Friday, November 27, 2015

माँ मुझे प्लीस जल्दी कुछ खाने को दो , मेरी ड्यूटी का टाइम हो रहा है। नाश्ते के इंतज़ार में बैठे हुए इंस्पेक्टर 'विक्रम सिंह' ने जोरदार आवाज़ में कहा।

'अभी आई बेटा' ,कहते हुए किचन से विक्रम की माँ अपने हाथ में आमलेट और ब्रेड की स्लाईस लिए जल्दी से टेबल पहुँचती है। 
(विक्रम जोकि अपने माँ और बाबा के साथ बम्बई के सरकारी क्वार्टर में रहता है। विक्रम अपने सारे डिपार्टमैंट में सबका चहेता इंस्पेक्टर है , इसका कारण है कि दो साल पहले जब विक्रम ने अपनी ड्यूटी ज्वॉइन की उसी दिन से हर वो शख़्स जो कानून का गुन्हेगार था अब वो विक्रम का दुश्मन था। कुछ छोटे मोटे क्रिमिनल्स को विक्रम ने सुधरने का मौका भी दिया लेकिन जिनके सर पे कोई असर ना हुआ , उनके लिए विक्रम नाम का ये शख्स बहुत बड़ी मुसीबत बन चुका था। विक्रम ने एक सब-इंस्पेक्टर की पोस्ट से अपनी नौकरी शुरू की लेकिन उसी साल के अंत तक विक्रम इंस्पेक्टर बन चुका था।  ये सब उसकी ईमानदारी और मेहनत का नतीजा था। )

विक्रम नाश्ता करने ही लगता है कि घर की डोर-बैल बजती है। विक्रम की माँ दरवाज़ा खोलने जाती है और अपने साथ विक्रम के पुलिस इंस्पेक्टर दोस्त जफ़र अली को साथ लती है। उसे देखते ही विक्रम उससे हाथ मिलाता है और माँ से चाय लाने को कहता है।

जफ़र जी आज आपको मेरी याद कैसे आ गई , 'विक्रम ने मजाकिया लहजे में कहा।'
मुझे तो लगा कि शायद तुझे पता होगा इसलिए मैं यहां तुझसे कुछ जरूरी बातें करने आया हूँ जो थाने में सबके सामने नही हो सकती थी। 'जफर ने हैरानी से विक्रम की ओर देखते हुए कहा।'

ऐसी क्या बात है जफ़र?

कमिश्नर सर ने हंम दोनों को एक ख़ास केस की इन्वेस्टिगेशन करने का आर्डर दिया है ,'जफ़र ने विक्रम की आँखों में देखते हुए कहा।'

ओह ! , तो इसमें हैरान होने की क्या बात है ?

विक्रम  हैरान मैं इसलिए हो रहा हूँ कि एक तरफ तो कमिश्नर सर ने हमें इस केस को खूफिया तरीके से हैंडल करने की सलाह दी है ओर कहा है कि डिपार्टमैंट का कोई भी आदमी इस बारे में ना जान पाये कि हंम दोनों किसी सीक्रेट केस पर काम कर रहे हैं। क्यूंकि जो केस हमें मिला है वो कोई मामूली केस नही है , इस केस के तार हमारे डिप्टी चीफ मिनिस्टर तक से जुड़े हुए हैं। इसलिए हंम इसे इतना ईसी नही ले सकते तब तक तो बिलकुल नही जब तक हमारे हाथ गुनहगारों के ख़िलाफ़ कोई पुख्ता सबूत नही लग जाते।

और.… और  दूसरी तरफ़ मुझे ,,,,,,"जफ़र अपनी बात बीच में ही अधूरी छोड़ देता है और विक्रम की माँ की तरफ देखता है जो हाथ में चाय लिए किचन से सीधा डायनिंग टेबल की तरफ आ रही होती है।" 

विक्रम अपनी माँ से चाय लेकर टेबल पर रखता है और उन्हें अंदर कमरे में जाने के लिए कहता है।

लेकिन जफर ये "और " का क्या माजरा है जरा खुल कर बताओ , "विक्रम ने अपनी को कमरे में जाते देख कहा।"

बात ये है विक्रम कि कमिश्नर सर ने मुझे कहा था कि उनके सिवा ये बात किसी को मालूम नहीं है कि उन्होंने  हमें इस केस इंवेस्टिगेट  करने का काम सौंपा है। लेकिन जब मैं कमिश्नर सर से बात करने के बाद वहाँ से निकला तो मुझे  मिला ?


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